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CLASS 8 • SANSKRIT • CHAPTER 7

मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा

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Quick answer
‘मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा’ कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् का सातवाँ पाठ है। संस्कृतदिवस के संवाद के बाद चार पदों के गीत में संस्कृत भाषा की साहित्यिक, सांस्कृतिक और ज्ञानपरम्परा की प्रशंसा की गई है।
Key points
  • सही NCERT शीर्षक ‘मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा’ है।
  • श्रावणी पूर्णिमा के संस्कृतदिवस पर विद्यालय में गीतगायन कार्यक्रम होता है।
  • चार पदों का गीत संस्कृत के मुनियों, कवियों, साहित्य और संस्कृति का वर्णन करता है।
  • नवरस और अलंकार संस्कृत काव्य की साहित्यिक विशेषताएँ हैं।
  • पाठ में समास-विग्रह, षष्ठी-सप्तमी विभक्ति और संस्कृत प्रश्नोत्तर का अभ्यास करें।

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मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा — सप्तमः पाठः

कक्षा ८ | संस्कृत | NCERT दीपकम् | पाठ ७

पाठ-परिचय

यह पाठ संस्कृत भाषा की साहित्यिक और सांस्कृतिक महिमा का वर्णन करने वाला चार पदों का गीत है। प्रारम्भ में दो बहनों का संवाद है। श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर संस्कृतदिवस मनाया जा रहा है। विद्यालय में पूरे सप्ताह कार्यक्रम रखे गए हैं; एक बहन गीतगायन-प्रतियोगिता में भाग लेती है और दूसरी को गीत सुनाती है। गीत में संस्कृत को ऋषियों, मुनियों, कवियों, वेद-वेदान्त, नवरसों और साहित्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ा गया है।

शीर्षक का अर्थ: मञ्जुल = मनोहर; मञ्जूषा = पेटिका/संग्रह; सुन्दर = सुंदर; सुरभाषा = देवभाषा (काव्यात्मक संबोधन)। अर्थात् सुंदर ज्ञान-संपदा से भरी संस्कृत भाषा।

अधिगम-उद्देश्य

  • संस्कृतदिवस के संवाद का आशय समझना।
  • गीत के चारों पदों का सरल हिन्दी भावार्थ बताना।
  • संस्कृत के प्रमुख कवियों और साहित्यिक शब्दों को पहचानना।
  • एकपदेन और पूर्णवाक्येन उत्तर लिखना।
  • समास-विग्रह, विभक्ति और पद-रचना के उदाहरण समझना।

संस्कृतदिवस का संवाद — हिन्दी सार

श्रावणी पूर्णिमा के दिन एक बालिका अपनी बहन से इस दिन का विशेष महत्त्व पूछती है। बहन बताती है कि आज संस्कृतदिवस है। उसके विद्यालय में संस्कृत से संबंधित कार्यक्रम पूरे सप्ताह आयोजित किए जा रहे हैं। वह गीतगायन प्रतियोगिता में भाग लेगी। दूसरी बहन भी कार्यक्रम में आने और गीत सुनने की इच्छा व्यक्त करती है। इसके बाद संस्कृत भाषा की प्रशंसा का गीत प्रस्तुत होता है।

गीत के चार पदों का क्रमवार अध्ययन

प्रथमः पदः — संस्कृत एक मनोहर ज्ञान-मञ्जूषा

पाठ का आरम्भ: मुनिवर-विकसित-कविवर-विलसित-मञ्जुलमञ्जूषा, सुन्दरसुरभाषा।

मुख्य शब्द: मुनिवर = श्रेष्ठ मुनि; कविवर = श्रेष्ठ कवि; विकसित = विकसित की गई; विलसित = सुशोभित; पोषणक्षमता = पोषण करने की शक्ति; वचनातीता = शब्दों से परे।

सरल भावार्थ: कवि संस्कृत को ऋषि-मुनियों और श्रेष्ठ कवियों द्वारा समृद्ध एक सुंदर ज्ञान-पेटिका कहता है। वह संस्कृत को माता के रूप में संबोधित कर उसकी ज्ञान-पोषण क्षमता को शब्दों से परे बताता है।

व्याख्या: यहाँ 'माता' और 'ज्ञान-मञ्जूषा' काव्यात्मक रूपक हैं; इन्हें शाब्दिक तथ्य के रूप में न पढ़ें।

द्वितीयः पदः — मुनियों, कवियों और सामान्य जनों की भाषा

गीत में वेदव्यास, वाल्मीकि, कालिदास और बाण जैसे साहित्यकारों के नाम आते हैं। संस्कृत को प्राचीन ग्रंथों तथा लोगों के जीवन से जुड़ी भाषा के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

शब्दार्थ: मुनीनाम् = मुनियों का; कवीनाम् = कवियों का; पौराणिक = प्राचीन/पुराणों से संबंधित; सामान्यजनानाम् = सामान्य लोगों का; जीवनस्य आशा = जीवन की आशा।

सरल भावार्थ: संस्कृत ने अनेक रचनाकारों की अभिव्यक्ति को स्वर दिया और साहित्य तथा सांस्कृतिक परंपराओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तृतीयः पदः — श्रवणसुख और प्रेरणादायक विचार

इस पद में संस्कृत के मधुर ध्वनि-सौन्दर्य, वेद-वेदान्त के विचारों और सांस्कृतिक ज्ञान की चर्चा है।

शब्दार्थ: ध्वनिश्रवणेन = ध्वनि सुनने से; सुखम् = आनंद; वर्धते = बढ़ता है; विचाराः = विचार; अभिप्रेरयन्ति = प्रेरित करते हैं; संस्कृतिः = संस्कृति।

सरल भावार्थ: संस्कृत के गीत, उच्चारण और विचार लोगों को आनंद तथा प्रेरणा दे सकते हैं। संस्कृत साहित्य में अनेक दार्शनिक और नैतिक विचार सुरक्षित हैं।

चतुर्थः पदः — नवरस, अलङ्कार और साहित्य-सौन्दर्य

गीत के अंतिम पद में संस्कृत साहित्य की रस-सम्पन्नता, अलंकारों और धरती पर उसकी प्रतिष्ठा का वर्णन है।

शब्दार्थ: नवरसाः = नौ रस; अलङ्काराः = साहित्यिक सौन्दर्य बढ़ाने वाले साधन; धरायाम् = पृथ्वी पर; विजयते = गौरव पाती है।

नवरसों का परिचय: शृङ्गार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत और शान्त।

सरल भावार्थ: संस्कृत काव्य में भावों की विविधता और कलात्मक अभिव्यक्ति की समृद्ध परंपरा है। कवि इस भाषा के सौन्दर्य का उत्सव मनाता है।

महत्वपूर्ण शब्दार्थ

संस्कृत हिन्दी अर्थ
मञ्जुल मनोहर
मञ्जूषा पेटिका, संग्रह
सुरभाषा देवभाषा (काव्यात्मक संबोधन)
श्रावणी पूर्णिमा श्रावण मास की पूर्णिमा
आसप्ताहम् पूरे सप्ताह
गीतगायनप्रतियोगिता गीत गाने की प्रतियोगिता
वचनातीता वाणी से परे
पोषणक्षमता पोषण की शक्ति
कविवर श्रेष्ठ कवि
मुनिवर श्रेष्ठ मुनि
पौराणिक प्राचीन/पुराण-संबंधी
अभिप्रेरयन्ति प्रेरित करते हैं
नवरसैः नौ रसों से
धरायाम् पृथ्वी पर
विजयते गौरव प्राप्त करती है

व्याकरण

१. समास-विग्रह

  • देवालयः = देवस्य आलयः — देव का मंदिर।
  • सुरभाषा = सुराणां भाषा — देवों की भाषा।
  • सुन्दरसुरभाषा = सुन्दरी सुरभाषा — सुंदर सुरभाषा।
  • पोषणक्षमता = पोषणस्य क्षमता — पोषण की क्षमता।
  • मञ्जुलभाषा = मञ्जुला भाषा — मनोहर भाषा।
  • नवरसरुचिरा = नवरसैः रुचिरा — नौ रसों से सुशोभित।

नोट: हर समस्तपद का एक ही प्रकार का समास नहीं होता। अर्थ के आधार पर विग्रह समझें।

२. विभक्ति-परिचय

रूप विभक्ति अर्थ
मम षष्ठी एकवचन (अस्मद्) मेरा
तव षष्ठी एकवचन (युष्मद्) तुम्हारा
जीवनस्य षष्ठी एकवचन जीवन का
जनानाम् षष्ठी बहुवचन लोगों का
धरायाम् सप्तमी एकवचन धरती पर
शास्त्रेषु सप्तमी बहुवचन शास्त्रों में
नवरसैः तृतीया बहुवचन नौ रसों से

३. वाक्य-अभ्यास

  • संस्कृतभाषा धरायां विजयते। — संस्कृत भाषा धरती पर गौरव प्राप्त करती है।
  • संस्कृतभाषायाः ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्धते। — संस्कृत भाषा की ध्वनि सुनने से आनंद बढ़ता है।
  • कविः संस्कृतभाषां मातरं मन्यते। — कवि संस्कृत भाषा को माता मानता है।

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर

अभ्यास १ — एकपदेन उत्तरं लिखत

(क) सुन्दरसुरभाषा कस्य वचनातीता? — मम (कवेः)।
(ख) संस्कृतभाषा कुत्र विजयते? — धरायाम्।
(ग) संस्कृतभाषा कस्य आशा? — जीवनस्य।
(घ) संस्कृते कति रसाः सन्ति? — नवरसाः।
(ङ) कस्याः ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्धते? — संस्कृतभाषायाः।

अभ्यास २ — पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत

(क) संस्कृतभाषा केषां जीवनस्य आशा अस्ति?
उत्तरम्: संस्कृतभाषा पौराणिकसामान्यजनानां जीवनस्य आशा अस्ति।

(ख) केषां विचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति?
उत्तरम्: वेदविषय-वेदान्तानां विचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति।

(ग) संस्कृतभाषा केन प्रकारेण समृद्धा अस्ति?
उत्तरम्: संस्कृतभाषा नवरसैः अलङ्कारैः च समृद्धा अस्ति।

अभ्यास ३ — प्रश्ननिर्माणम् (अतिरिक्त अभ्यास)

रेखांकित पद के स्थान पर उपयुक्त प्रश्नवाचक पद रखिए:

  • संस्कृतभाषा धरायाम् विजयते। → संस्कृतभाषा कुत्र विजयते?
  • संस्कृतभाषायाः ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्धते। → कस्याः ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्धते?
  • संस्कृतभाषा जीवनस्य आशा अस्ति। → संस्कृतभाषा कस्य आशा अस्ति?

अभ्यास ४ — समास-विग्रहः (अतिरिक्त अभ्यास)

१. देवस्य आलयः → देवालयः।
२. सुराणां भाषा → सुरभाषा।
३. पोषणस्य क्षमता → पोषणक्षमता।
४. मञ्जुला भाषा → मञ्जुलभाषा।
५. नवरसैः रुचिरा → नवरसरुचिरा।

अभ्यास ५ — रिक्तस्थानानि (अतिरिक्त अभ्यास)

१. संस्कृतभाषा ______ विजयते। — धरायाम्।
२. संस्कृतभाषायां ______ रसाः सन्ति। — नव।
३. ______ ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्धते। — संस्कृतभाषायाः।
४. संस्कृतदिवसः ______ पूर्णिमायाम् आचर्यते। — श्रावणी।

अभ्यास ६ — सही विकल्प चुनें (अतिरिक्त अभ्यास)

१. मञ्जूषा का अर्थ क्या है? (क) पेटिका (ख) नदी (ग) पर्वत। उत्तर: क।
२. गीत में संस्कृत को किस रूप में संबोधित किया गया है? (क) माता (ख) पुत्र (ग) राजा। उत्तर: क।
३. संस्कृत काव्य में कितने रस बताए गए हैं? (क) पाँच (ख) नौ (ग) तीन। उत्तर: ख।
४. धरायाम् कौन-सी विभक्ति है? (क) सप्तमी (ख) तृतीया (ग) षष्ठी। उत्तर: क।
५. 'जनानाम्' कौन-सा रूप है? (क) षष्ठी बहुवचन (ख) प्रथमा एकवचन (ग) सप्तमी बहुवचन। उत्तर: क।

सामान्य गलतियाँ

  • सही पाठ-शीर्षक ‘मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा’ है, ‘सुन्दरसुभाषा’ नहीं।
  • मञ्जूषा का अर्थ ज्ञान-संग्रह के लिए प्रयुक्त पेटिका है, केवल आभूषण-पेटी नहीं।
  • नवरसाः का अर्थ नौ रस हैं; नौ श्लोक नहीं।
  • धरायाम् सप्तमी एकवचन है, जनानाम् षष्ठी बहुवचन।
  • कवि द्वारा संस्कृत को ‘माता’ कहना साहित्यिक रूपक है।

पाठ-सार और पुनरावृत्ति

यह गीत संस्कृतदिवस के अवसर पर गाया जाता है। चार पदों में संस्कृत के कवियों, मुनियों, वेद-वेदान्त, सांस्कृतिक विरासत, नौ रसों और साहित्यिक अलंकारों का वर्णन है। अभ्यास के लिए गीत के चारों पदों का भावार्थ, एकपद प्रश्न, समास-विग्रह और विभक्ति-रूप दोहराएँ।

गतिविधि

विद्यालय में संस्कृतदिवस के लिए एक छोटा गीत या संवाद तैयार करें। तीन संस्कृत शब्दों का हिन्दी अर्थ लिखें और किसी संस्कृत कवि या रचना का परिचय विश्वसनीय पुस्तकालय स्रोत से खोजें।

पाठ्यस्रोत और सीमा

NCERT, दीपकम्, कक्षा ८, सप्तमः पाठः। मूल अध्याय PDF: https://www.evidyarthi.in/wp-content/uploads/2020/10/cbse-class-8-deepakam-sanskrit-book-chapter-7.pdf । यह स्वतंत्र अध्ययन-सामग्री है। मूल पुस्तक के आठ अभ्यास-समूहों में से कुछ पाठ्यपुस्तक प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं और अतिरिक्त अभ्यास अलग चिह्नित हैं; सभी प्रश्नों का स्वतंत्र पंक्ति-दर-पंक्ति मिलान अभी शेष है।

Frequently asked questions

कक्षा 8 दीपकम् के पाठ 7 का सही नाम क्या है?

सही शीर्षक ‘मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा’ है।

यह पाठ किस अवसर से आरम्भ होता है?

श्रावणी पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले संस्कृतदिवस के संवाद से पाठ आरम्भ होता है।

इस पाठ के गीत में कितने पद हैं?

इस पाठ में संस्कृत भाषा की महिमा का वर्णन करने वाले चार पद हैं।

‘मञ्जुलमञ्जूषा’ का अर्थ क्या है?

मनोहर पेटिका या सुंदर ज्ञान-संग्रह; गीत में संस्कृत भाषा के लिए काव्यात्मक रूपक है।

‘संस्कृतभाषा कुत्र विजयते?’ का उत्तर क्या है?

धरायाम्। अर्थात् पृथ्वी पर।

इस पाठ के प्रमुख व्याकरण विषय क्या हैं?

समास-विग्रह, षष्ठी-सप्तमी विभक्ति के रूप और प्रश्ननिर्माण उपयोगी अभ्यास हैं।

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