- ‘कोऽरुक्’ = कः + अरुक्; अर्थ ‘कौन नीरोग है?’।
- धन्वन्तरि शुक-रूप में वैद्यों की परीक्षा लेते हैं और वाग्भट उत्तर देते हैं।
- हितभुक्, मितभुक् और ऋतुभुक् पाठ के तीन प्रमुख आहार-सूत्र हैं।
- दिनचर्या के श्लोक में व्यायाम, दन्तविशोधन, स्वच्छ स्नान और भोजन का उल्लेख है।
- विशेषण और विशेष्य के लिङ्ग, वचन तथा विभक्ति में मेल होता है।
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कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्? — नवमः पाठः
कक्षा ८ | संस्कृत | NCERT दीपकम् | पाठ ९
पाठ का संक्षिप्त उत्तर
‘कोऽरुक्?’ का पदच्छेद कः + अरुक् है, जिसका अर्थ है ‘कौन नीरोग है?’। पाठ में धन्वन्तरि शुक (तोते) का रूप धारण करके यही प्रश्न पूछते हैं। आचार्य वाग्भट उत्तर देते हैं—हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्: हितकर भोजन करने वाला, उचित मात्रा में खाने वाला और ऋतु के अनुकूल आहार लेने वाला।
सीखने के उद्देश्य
- पारिवारिक संवाद और धन्वन्तरि–वाग्भट कथा का क्रम समझना।
- ‘कोऽरुक्’ का सन्धिविच्छेद और तीन आहार-सूत्रों का अर्थ बताना।
- पाठ में आए पाँच स्वास्थ्य-संबंधी श्लोकों के प्रमुख विचार समझना।
- विशेषण और विशेष्य का लिङ्ग-वचन-विभक्ति के अनुसार मेल पहचानना।
- संस्कृत प्रश्नों के उत्तर और सरल वाक्य लिखना।
पाठ की कहानी — क्रमवार हिन्दी सार
१. घर में भोजन पर संवाद
एक बालिका को भूख लगी है। वह माता से तुरंत भोजन माँगती है। माता बताती हैं कि भोजन अभी अत्युष्णम् अर्थात् बहुत गरम है और थोड़ा प्रतीक्षा करने को कहती हैं। पिता समझाते हैं कि बहुत गरम भोजन स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं माना जाता। इसी से आयुर्वेद और भोजन के उचित नियमों की चर्चा शुरू होती है।
२. धन्वन्तरि का शुक-रूप
कथा के अनुसार भगवान् धन्वन्तरि भारत में चिकित्सकों के ज्ञान की परीक्षा लेने के लिए सुंदर तोते का रूप धारण करते हैं। वे गाँव-गाँव जाकर वृक्ष पर बैठते हैं और पुकारते हैं—‘कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?’। अनेक लोग इस प्रश्न पर ध्यान नहीं देते।
३. वाग्भट का उत्तर
अंततः तोता प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य वाग्भट की कुटी के पास पहुँचता है। वाग्भट प्रश्न का अर्थ समझते हैं और उत्तर देते हैं—‘हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्’। कथा में धन्वन्तरि इस उत्तर से प्रसन्न होते हैं। यह प्रसंग पारंपरिक शिक्षाप्रद आख्यान है; इसे किसी ऐतिहासिक घटना का वैज्ञानिक प्रमाण न समझें।
४. तीन सूत्रों का अर्थ
| संस्कृत पद | अर्थ | व्यवहारिक उदाहरण |
|---|---|---|
| हितभुक् | हितकर और पोषण देने वाला भोजन करने वाला | विविध, स्वच्छ और संतुलित भोजन |
| मितभुक् | आवश्यकता के अनुरूप मात्रा में भोजन करने वाला | भूख और तृप्ति के संकेत समझकर खाना |
| ऋतुभुक् | ऋतु और परिस्थिति के अनुकूल भोजन करने वाला | मौसम के अनुरूप उपलब्ध पौष्टिक खाद्य चुनना |
सावधानी: ‘मितभुक्’ का अर्थ बच्चों के लिए भोजन छोड़ना, भूखे रहना या कठोर कैलोरी-सीमा अपनाना नहीं है। बढ़ते बच्चों को पर्याप्त और संतुलित पोषण चाहिए। बीमारी या विशेष आहार-संबंधी जरूरत में चिकित्सकीय सलाह महत्त्वपूर्ण है।
पाँच श्लोकों का विषयवार अध्ययन
श्लोक १ — हितकर आहार
पाठ का प्रथम स्वास्थ्य-संबंधी पद्य इस बात पर बल देता है कि भोजन का चयन केवल स्वाद से नहीं, बल्कि उसके गुण, स्वच्छता और व्यक्ति के हित को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
मुख्य विचार: हितभुक् — जो भोजन स्वास्थ्य के लिए अनुकूल हो उसे ग्रहण करना।
श्लोक २ — उचित मात्रा
अगले पद्य में भोजन की मात्रा और पाचन-संबंधी सावधानी पर विचार मिलता है। आवश्यकता से अधिक खाना और बिना सोचे-समझे आहार लेना उचित नहीं बताया गया है।
मुख्य विचार: मितभुक् — अपनी जरूरत के अनुसार भोजन करना।
श्लोक ३ — ऋतु के अनुकूल भोजन
पाठ में वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरद्, हेमन्त और शिशिर—छह ऋतुओं का उल्लेख है। आहार में ऋतु, उपलब्धता और व्यक्ति की आवश्यकता का ध्यान रखने की बात कही गई है।
मुख्य विचार: ऋतुभुक् — मौसम के अनुकूल पौष्टिक भोजन चुनना।
श्लोक ४ — दिनचर्या
व्यायामः प्रातरुत्थाय, नित्यं दन्तविशोधनम्।
स्वच्छजलेन सुस्नानं, बुभुक्षायाञ्च भोजनम्॥
पदच्छेदः: व्यायामः, प्रातः, उत्थाय, नित्यम्, दन्तविशोधनम्, स्वच्छजलेन, सुस्नानम्, बुभुक्षायाम्, च, भोजनम्।
अन्वयः: नित्यं प्रातः उत्थाय व्यायामः (करणीयः), दन्तविशोधनं (कर्तव्यम्), स्वच्छजलेन सुस्नानं (कार्यम्), बुभुक्षायां च भोजनं (कर्तव्यम्)।
हिन्दी भावार्थ: प्रतिदिन सुबह उठकर व्यायाम करना, दाँत साफ करना, स्वच्छ जल से स्नान करना और भूख लगने पर भोजन करना चाहिए।
नोट: बच्चों की नियमित भोजन-व्यवस्था और पर्याप्त पोषण आवश्यक हैं; इस पद्य को भोजन छोड़ने की सलाह न मानें।
श्लोक ५ — स्वास्थ्यरक्षा का समग्र संदेश
अंतिम स्वास्थ्य-विषयक पद्य का अध्ययन करते समय पाठ के केंद्रीय सिद्धांत याद रखें: उचित आहार, स्वच्छता, नियमित दिनचर्या और विवेकपूर्ण व्यवहार। किसी पारंपरिक स्वास्थ्य-दावे को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प न मानें।
अध्ययन-सीमा: ऊपर श्लोक १–३ और ५ के विषयगत भावार्थ दिए गए हैं, उनके मूल संस्कृत पाठ का अप्रमाणित प्रतिलेखन नहीं। श्लोकों के सटीक शब्द और पदच्छेद के लिए मूल NCERT पुस्तक देखें।
महत्त्वपूर्ण शब्दार्थ
| संस्कृत पद | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| अरुक् | नीरोग, रोगरहित |
| निरामयः | स्वस्थ |
| शुकः | तोता |
| वैद्यः | चिकित्सक |
| कुटी | छोटी कुटिया |
| झटिति | तुरंत |
| अत्युष्णम् | बहुत गरम |
| बुभुक्षा | भूख |
| प्रतीक्षस्व | प्रतीक्षा करो |
| हितकरम् | लाभदायक |
| हितभुक् | हितकर भोजन करने वाला |
| मितभुक् | उचित मात्रा में भोजन करने वाला |
| ऋतुभुक् | ऋतु के अनुकूल भोजन करने वाला |
| प्रयुञ्जीत | उपयोग करना चाहिए |
| अनुवर्तते | अनुसरण करता है |
| गरिष्ठम् | कठिनाई से पचने वाला |
| लघु | हल्का, सुपाच्य (संदर्भानुसार) |
| दन्तविशोधनम् | दाँतों की सफाई |
| प्रातरुत्थाय | सुबह उठकर |
| स्वच्छजलेन | स्वच्छ जल से |
| अनुत्पत्तिकरम् | उत्पन्न न होने देने वाला |
संस्कृत व्याकरण
१. सन्धिविच्छेद
- कोऽरुक् = कः + अरुक्।
- बुभुक्षायाञ्च = बुभुक्षायाम् + च।
- प्रातरुत्थाय = प्रातः + उत्थाय।
‘कोऽरुक्’ में विसर्ग-सन्धि के बाद अवग्रह ऽ आता है। प्रश्न का अर्थ ‘कौन स्वस्थ है?’ है, ‘कौन बीमार है?’ नहीं।
२. विशेषण–विशेष्य
विशेषण संज्ञा की विशेषता बताता है; विशेष्य वह संज्ञा है जिसकी विशेषता बताई जा रही है। संस्कृत में सामान्यतः विशेषण और विशेष्य का लिङ्ग, वचन और विभक्ति समान होते हैं।
| विशेषण + विशेष्य | व्याख्या |
|---|---|
| सुन्दरः शुकः | सुंदर तोता — पुल्लिङ्ग, एकवचन, प्रथमा |
| सुन्दरी बालिका | सुंदर लड़की — स्त्रीलिङ्ग, एकवचन, प्रथमा |
| सुन्दरं फलम् | सुंदर फल — नपुंसकलिङ्ग, एकवचन, प्रथमा |
| उष्णं भोजनम् | गरम भोजन — नपुंसकलिङ्ग, एकवचन, प्रथमा |
| स्वच्छेन जलेन | स्वच्छ जल से — नपुंसकलिङ्ग, एकवचन, तृतीया |
त्रुटि सुधार: ‘सुन्दरः बालिका’ अशुद्ध है; सही रूप ‘सुन्दरी बालिका’ है।
३. उपयोगी विभक्तियाँ
- वैद्यस्य — षष्ठी एकवचन, वैद्य का।
- कुट्याः समीपे — कुटी के निकट।
- वृक्षे — सप्तमी एकवचन, वृक्ष पर।
- स्वच्छजलेन — तृतीया एकवचन, स्वच्छ जल से।
- बुभुक्षायाम् — सप्तमी एकवचन, भूख होने पर।
अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पाठ-आधारित प्रश्नोत्तर
एकपदेन उत्तराणि
१. धन्वन्तरिः कस्य रूपं धृतवान्? — शुकस्य।
२. ‘कोऽरुक्?’ इति प्रश्नस्य उत्तरं कः दत्तवान्? — वाग्भटः।
३. शुकः किं पृच्छति स्म? — कोऽरुक्?
४. भोजनं कीदृशम् आसीत्? — अत्युष्णम्।
५. दन्तविशोधनं कदा करणीयम्? — नित्यम्।
पूर्णवाक्येन उत्तराणि
१. धन्वन्तरिः किमर्थं शुकरूपं धृतवान्?
उत्तरम्: धन्वन्तरिः वैद्यानां ज्ञानं परीक्षितुं शुकरूपं धृतवान्।
२. वाग्भटः शुकस्य प्रश्नस्य किम् उत्तरं दत्तवान्?
उत्तरम्: वाग्भटः ‘हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्’ इति उत्तरं दत्तवान्।
३. हितभुक् कः भवति?
उत्तरम्: यः हितकरं भोजनं खादति सः हितभुक् भवति।
४. मितभुक् कः भवति?
उत्तरम्: यः आवश्यकतानुसारं मितं भोजनं करोति सः मितभुक् भवति।
५. ऋतुभुक् कः भवति?
उत्तरम्: यः ऋतोः अनुकूलं भोजनं करोति सः ऋतुभुक् भवति।
अतिरिक्त अभ्यास — रिक्तस्थानानि
१. कोऽरुक् = ______ + अरुक्। उत्तरम्: कः।
२. धन्वन्तरिः ______ रूपं धृतवान्। उत्तरम्: शुकस्य।
३. हितभुक्, ______, ऋतुभुक्। उत्तरम्: मितभुक्।
४. ______ भोजनं हितकरं न भवति। उत्तरम्: अत्युष्णम्।
५. नित्यं ______ करणीयम्। उत्तरम्: दन्तविशोधनम्।
अतिरिक्त अभ्यास — विशेषण चुनिए
१. सुन्दरः शुकः — विशेषण: सुन्दरः।
२. उष्णं भोजनम् — विशेषण: उष्णम्।
३. स्वच्छेन जलेन — विशेषण: स्वच्छेन।
४. हितकरं भोजनम् — विशेषण: हितकरम्।
अतिरिक्त बहुविकल्पीय प्रश्न
१. ‘अरुक्’ का अर्थ क्या है? (क) रोगी (ख) नीरोग (ग) भूखा। उत्तर: ख।
२. शुकः किसे कहते हैं? (क) तोता (ख) घोड़ा (ग) मोर। उत्तर: क।
३. वाग्भट ने क्या उत्तर दिया? (क) हितभुक्-मितभुक्-ऋतुभुक् (ख) केवल फलभुक् (ग) केवल जलभुक्। उत्तर: क।
४. ‘सुन्दरी बालिका’ में विशेषण क्या है? (क) बालिका (ख) सुन्दरी (ग) दोनों। उत्तर: ख।
५. ‘स्वच्छजलेन’ में कौन-सी विभक्ति है? (क) प्रथमा (ख) तृतीया (ग) सप्तमी। उत्तर: ख।
सामान्य गलतियाँ
- ‘कोऽरुक्’ का अर्थ कौन नीरोग है, न कि ‘कौन रोगी है’।
- ‘मितभुक्’ का अर्थ भूखे रहना नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार भोजन करना है।
- ‘ऋतुभुक्’ का अर्थ केवल किसी एक मौसम का भोजन करना नहीं है।
- धन्वन्तरि और शुक का प्रसंग पारंपरिक शिक्षाप्रद कथा है; ऐतिहासिक सत्यापन का दावा न करें।
- विशेषण-विशेष्य में लिङ्ग, वचन और विभक्ति का मेल देखें।
पुनरावृत्ति — पाँच मुख्य बिंदु
१. पाठ की शुरुआत बहुत गरम भोजन पर घरेलू संवाद से होती है।
२. धन्वन्तरि तोते का रूप लेकर ‘कोऽरुक्?’ पूछते हैं।
३. वाग्भट तीन सूत्र बताते हैं: हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्।
४. पाठ में स्वच्छता और दिनचर्या पर भी चर्चा है।
५. व्याकरण का प्रमुख विषय विशेषण–विशेष्य है।
अध्ययन गतिविधि
एक सप्ताह की संतुलित भोजन-डायरी बनाएँ और उसमें विभिन्न खाद्य समूहों तथा मौसम में उपलब्ध खाद्य पदार्थों को चिह्नित करें। भोजन की मात्रा कम करने या वजन घटाने की प्रतियोगिता न बनाएँ। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
पाठ्यस्रोत और सीमा
प्राथमिक स्रोत: NCERT, कक्षा ८, दीपकम्, नवमः पाठः — https://www.evidyarthi.in/wp-content/uploads/2020/10/cbse-class-8-deepakam-sanskrit-book-chapter-9.pdf । अतिरिक्त अध्याय संदर्भ: https://schools.aglasem.com/ncert-books-class-8-sanskrit-chapter-9/ । यहाँ मूल कथा का स्वतंत्र हिन्दी अध्ययन-सार, एक सत्यापित दिनचर्या-श्लोक, विषयगत व्याख्या, चयनित पाठ-आधारित उत्तर और स्पष्ट चिह्नित अतिरिक्त अभ्यास दिए गए हैं। मूल पुस्तक के छह अभ्यास-समूहों के सभी प्रश्नों और पाँचों श्लोकों के संपूर्ण मूल पाठ का स्वतंत्र शब्दशः सत्यापन अभी शेष है।
Frequently asked questions
‘कोऽरुक्?’ का अर्थ क्या है?
‘कोऽरुक्’ का सन्धिविच्छेद कः + अरुक् है; इसका अर्थ ‘कौन नीरोग है?’ है।
धन्वन्तरि ने किसका रूप धारण किया?
कथा के अनुसार धन्वन्तरि ने शुक अर्थात् तोते का रूप धारण किया।
वाग्भट ने ‘कोऽरुक्?’ का क्या उत्तर दिया?
उन्होंने ‘हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्’ कहा।
हितभुक्, मितभुक् और ऋतुभुक् का अर्थ क्या है?
हितभुक् हितकर भोजन करने वाला, मितभुक् उचित मात्रा में खाने वाला और ऋतुभुक् ऋतु-अनुकूल भोजन करने वाला है।
इस पाठ का प्रमुख व्याकरण विषय क्या है?
विशेषण–विशेष्य का लिङ्ग, वचन और विभक्ति के अनुसार मेल प्रमुख विषय है।
क्या मितभुक् का अर्थ बच्चों को कम खाना चाहिए?
नहीं। इसका आशय अपनी पोषण-संबंधी जरूरतों के अनुसार संतुलित मात्रा में भोजन करना है; बच्चों को पर्याप्त पोषण आवश्यक है।
