- ‘दो गौरैया’ भीष्म साहनी की कक्षा 8 हिंदी मल्हार की कहानी है।
- कथावाचक घर का बेटा है; घर में माँ, पिताजी और वह रहते हैं।
- पिताजी घर को सराय कहते हैं क्योंकि अनेक जीव-जंतु वहाँ रहते हैं।
- दो गौरैयाँ बैठक के पंखे के गोले में घोंसला बनाती हैं।
- पिताजी ताली, लाठी और दरवाजे बंद करने जैसे कई उपाय करते हैं।
- गौरैयाँ दरवाजों के नीचे की जगह और टूटे रोशनदान से लौटती हैं।
- माँ विनोदी और पक्षियों के प्रति संवेदनशील हैं।
- बच्चों की आवाज सुनकर पिताजी घोंसला तोड़ना रोक देते हैं।
- अंत में पिताजी मुसकराते हैं, जो उनके दृष्टिकोण में बदलाव दर्शाता है।
- कहानी में हास्य, व्यंग्य, मानवीकरण और प्रथम पुरुष कथन हैं।
- ‘खिलखिलाकर’ क्रिया-विशेषण का उदाहरण है।
- अतिरिक्त पठन ‘मित्रलाभ’ सहयोग और मित्रता का संदेश देता है।
- विश्व गौरैया दिवस 20 मार्च को मनाया जाता है।
- पंखे में सक्रिय घोंसला होने पर उपकरण बंद रखना चाहिए।
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दो गौरैया: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 2, विस्तृत व्याख्या और प्रश्न उत्तर
सीधा उत्तर: ‘दो गौरैया’ भीष्म साहनी की कहानी है। दो गौरैयाँ एक परिवार के घर में घोंसला बनाती हैं। पिताजी उन्हें बार-बार भगाने की कोशिश करते हैं, लेकिन घोंसले में नन्हे बच्चों की आवाज सुनकर रुक जाते हैं। उनका बदलता व्यवहार पशु-पक्षियों के प्रति करुणा, सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता का संदेश देता है।
स्रोत: एनसीईआरटी कक्षा 8 हिंदी मल्हार, पाठ 2, कहानी के मुद्रित पृष्ठ 14 से 18 तथा अभ्यास पृष्ठ 19 से 28। अतिरिक्त पठन ‘मित्रलाभ’ पृष्ठ 29 से 35 पर है। प्रश्न पाठ्यपुस्तक के आशय के अनुसार स्पष्ट रूप में लिखे गए हैं; लंबे मूल पाठ की पुनरावृत्ति नहीं की गई है।
पाठ का परिचय
‘दो गौरैया’ भीष्म साहनी की हास्य और करुणा से भरी कहानी है। एक परिवार के घर में अनेक जीव-जंतु आते-जाते हैं। दो गौरैयाँ बैठक में घोंसला बनाती हैं। पिताजी उन्हें हटाने का प्रयत्न करते हैं, पर घोंसले में उनके बच्चों को देखकर अपना निर्णय बदल देते हैं। कहानी का संदेश है कि दूसरे जीवों की जरूरतें समझने से मनुष्य का दृष्टिकोण बदल सकता है।
लेखक परिचय
भीष्म साहनी (1915 से 2003) हिंदी के महत्त्वपूर्ण कहानीकार, उपन्यासकार और नाटककार थे। उनकी रचनाओं में सामान्य जीवन, मानवीय संबंध, संवेदना और सामाजिक विडंबनाएँ दिखाई देती हैं। इस कहानी में छोटी घरेलू घटना के माध्यम से हास्य और करुणा दोनों प्रस्तुत होते हैं।
कथावाचक और घर का वातावरण
कहानी घर के बेटे की ‘मैं’ शैली में कही गई है। घर में माँ, पिताजी और कथावाचक रहते हैं, लेकिन आम के पेड़ पर अनेक पक्षी आते हैं। भीतर चूहे, कबूतर, चमगादड़, छिपकलियाँ और चींटियाँ हैं; बिल्ली भी कभी-कभी आती है। पिताजी मजाक में कहते हैं कि घर सराय बन गया है। यह कथन उनकी झुँझलाहट को दिखाता है।
गौरैयों का निरीक्षण और घोंसला
दो गौरैयाँ घर में आती हैं, अलग-अलग जगह बैठकर मानो मकान का निरीक्षण करती हैं और चली जाती हैं। दो दिन बाद वे बैठक की छत के पंखे के गोले में तिनकों का घोंसला बना लेती हैं। माँ समझ जाती हैं कि अब उन्हें हटाना कठिन होगा, क्योंकि पक्षियों ने स्थान को अपना आश्रय बना लिया है।
पिताजी की पहली कोशिश
पिताजी ताली बजाते हैं, हाथ हिलाते हैं, ऊँचा कूदते हैं और आवाजें निकालते हैं। गौरैयाँ डरकर स्थायी रूप से जाने के बजाय इधर-उधर बैठती रहती हैं। माँ पिताजी की हरकतों पर हँसती हैं। यह दृश्य हास्य पैदा करता है, लेकिन साथ ही पिताजी के बढ़ते गुस्से को भी दिखाता है।
दरवाजे बंद करने की योजना
माँ सलाह देती हैं कि एक दरवाजा खुला छोड़कर बाकी बंद कर दें। पिताजी ऐसा करते हैं और गौरैयाँ बाहर निकल जाती हैं। पर वे दरवाजों के नीचे की खाली जगह से वापस आ जाती हैं। पिताजी कपड़े ठूँसते हैं, तब वे टूटे शीशे वाले रोशनदान से लौट आती हैं। इससे कहानी में बार-बार असफल होने का हास्य और पक्षियों की दृढ़ता दोनों उभरते हैं।
घोंसला तोड़ने का निर्णय
लगातार असफल होने पर पिताजी घोंसला हटाने का निश्चय करते हैं। वे स्टूल पर चढ़कर लाठी से तिनके खींचने लगते हैं। बाहर दीवार पर बैठी दोनों बड़ी गौरैयाँ चुप और व्याकुल दिखाई देती हैं। पहले चहचहाने वाली चिड़ियों का गुमसुम होना इस बात का संकेत है कि घोंसले को खतरा है।
कहानी का निर्णायक मोड़
अचानक घोंसले से नन्हे बच्चों की आवाज आती है। पिताजी रुक जाते हैं और लाठी अलग रख देते हैं। माँ दरवाजे खोलती हैं। दोनों बड़ी गौरैयाँ लौटकर अपने बच्चों को चुग्गा खिलाती हैं। अब भी कमरे में चहचहाहट है, पर पिताजी उसे सहते हुए मुसकराते हैं। यही उनके दृष्टिकोण का वास्तविक परिवर्तन है।
पिताजी का चरित्र-चित्रण
पिताजी व्यवस्था और सफाई चाहते हैं, जल्दी चिढ़ते हैं और हार न मानने का दावा करते हैं। उनके प्रयासों में हास्य है। किंतु जब बच्चों की असुरक्षा सामने आती है, तो वे करुणा दिखाते हैं। उन्हें केवल क्रूर कहना गलत होगा, क्योंकि कहानी का अंत उनकी संवेदनशीलता उजागर करता है।
माँ का चरित्र-चित्रण
माँ व्यावहारिक, विनोदी और सहानुभूतिशील हैं। वे पिताजी की असफलताओं पर हल्का व्यंग्य करती हैं और बार-बार समझाती हैं कि गौरैयाँ घोंसला छोड़ने वाली नहीं। अंत में वे दरवाजे खोल देती हैं ताकि माता-पिता पक्षी अपने बच्चों के पास लौट सकें।
दो गौरैयों का व्यवहार
गौरैयाँ घर में सुरक्षित स्थान ढूँढ़ती हैं, घोंसला बनाती हैं, बार-बार लौटती हैं और अपने बच्चों की देखभाल करती हैं। घोंसला टूटने की आशंका पर वे गुमसुम हो जाती हैं। यह व्यवहार उनके आश्रय और संतानों से जुड़े प्राकृतिक आग्रहों को दर्शाता है; मानव जैसी भाषा बोलना लेखक की कल्पनात्मक शैली है।
हास्य, व्यंग्य और मानवीकरण
पिताजी का ऊँचा कूदना, चिड़ियों का मानो उनका नाच देखना, चूहों को अलग-अलग पसंद वाला बताना और घर को सराय कहना हास्यपूर्ण हैं। माँ का चूहों को न निकाल पाने वाला कथन व्यंग्य है। पक्षियों को गाना गाते, निरीक्षण करते और बातें करते हुए दिखाना मानवीकरण का उदाहरण है।
कथानक, संघर्ष और समाधान
आरंभ में घर का परिचय मिलता है। फिर दो गौरैयों का प्रवेश संघर्ष पैदा करता है। पिताजी की लगातार योजनाएँ विफल होती हैं। घोंसला तोड़ने के क्षण पर तनाव चरम पर पहुँचता है। बच्चों की आवाज से पिताजी का मन बदलना चरम बिंदु और समाधान दोनों है।
केंद्रीय भाव और जीवन-मूल्य
कहानी सिखाती है कि किसी जीव की असुविधाजनक उपस्थिति को समझने से पहले उसकी जरूरतें देखनी चाहिए। सह-अस्तित्व में करुणा, स्वच्छता और सुरक्षा का संतुलन आवश्यक है। बिजली के पंखे में सक्रिय घोंसला होना वास्तविक जीवन में जोखिमपूर्ण हो सकता है; ऐसी स्थिति में पंखा न चलाएँ और स्थानीय वन्यजीव सहायता से सुरक्षित सलाह लें।
शब्दार्थ
सराय: यात्रियों के ठहरने का स्थान; निरीक्षण: ध्यान से जाँच; रोशनदान: ऊपर बना हवा और प्रकाश का छोटा रास्ता; व्यंग्य: संकेतपूर्ण उपहास; गुमसुम: चुप और उदास; सहनशीलता: सहने की क्षमता; अवाक्: आश्चर्य से चुप; चुग्गा: पक्षियों का भोजन; थिगली: कपड़े का छोटा टुकड़ा; फाहा: रुई का छोटा गुच्छा; ठिठकना: अचानक रुकना; धमाचौकड़ी: शोरगुल के साथ भागदौड़।
घटनाक्रम और पात्रों का तुलनात्मक अध्ययन
| क्रम और घटना | पिताजी की प्रतिक्रिया | गौरैयों और माँ की भूमिका |
|---|---|---|
| 1. दो पक्षियों का घर देखना | घर में नए पक्षियों से झुँझलाहट | गौरैयाँ सुरक्षित जगह ढूँढ़ती हैं |
| 2. पंखे में घोंसला | उन्हें हटाने का निश्चय | माँ चेताती हैं कि अब वे नहीं जाएँगी |
| 3. ताली और लाठी | बार-बार भगाने की कोशिश | माँ हँसती हैं; पक्षी जगह बदलते हैं |
| 4. दरवाजे बंद | कुछ समय के लिए सफलता | पक्षी नीचे की जगह से लौटते हैं |
| 5. रोशनदान बंद | प्रवेश रोकने का प्रयास | पक्षी फिर भी लौटते हैं |
| 6. घोंसला तोड़ना | गुस्से में तिनके खींचते हैं | बड़ी गौरैयाँ गुमसुम हो जाती हैं |
| 7. बच्चों की आवाज | लाठी छोड़कर बैठ जाते हैं | माँ दरवाजे खोलती हैं |
| 8. बच्चों को भोजन | मुसकराकर देखते हैं | माता-पिता पक्षी चुग्गा देते हैं |
मेरी समझ से: पाँच बहुविकल्पीय प्रश्न, सभी विकल्प और समाधान
प्रश्न 1. पिताजी घर को सराय क्यों कहते हैं? सभी उपयुक्त विकल्प चुनिए। (क) घर बहुत विशाल है; (ख) विभिन्न पक्षी और जीव रहते हैं; (ग) मनुष्य घर के मालिक नहीं; (घ) जीव आते-जाते रहते हैं।
व्याख्या: घर में चूहे, कबूतर, छिपकलियाँ और अनेक पक्षी रहते हैं तथा दूसरे जीव आते-जाते हैं। सराय कहना हास्यपूर्ण तुलना है, घर के आकार का विवरण नहीं।
उत्तर: सही विकल्प (ख) और (घ)।
प्रश्न 2. कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है? (क) माँ-पिताजी; (ख) लेखक; (ग) घर में रहने वाले जीव-जंतु; (घ) मिलने आने वाले मेहमान।
व्याख्या: पिताजी की व्यंग्यपूर्ण टिप्पणी बताती है कि जीव-जंतु घर में मनमाने ढंग से रहते हैं, मानो उन्हीं का अधिकार हो।
उत्तर: सही विकल्प (ग), घर में रहने वाले जीव-जंतु।
प्रश्न 3. गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रिया क्या थी? (क) दोनों ने स्वागत किया; (ख) पिताजी भगाना चाहते थे, माँ रोकती थीं; (ग) दोनों ने मिलकर निकाला; (घ) माँ भगाती थीं, पिताजी रोकते थे।
व्याख्या: पिताजी लाठी से भगाते हैं, जबकि माँ उनकी योजना पर हँसती और चिड़ियों को न हटाने की सलाह देती हैं।
उत्तर: सही विकल्प (ख)।
प्रश्न 4. माँ के मुसकराने और मजाक करने से क्या पता चलता है? (क) वे गौरैयों को भगाना नहीं चाहतीं; (ख) पिताजी के प्रयास व्यर्थ लगते हैं; (ग) चिड़ियों की गतिविधियाँ हास्यास्पद लगती हैं; (घ) उन्हें सबका अपमान करना पसंद है।
व्याख्या: माँ को पिताजी की असफल कोशिशों पर हँसी आती है और वे पक्षियों के प्रति सहानुभूति रखती हैं। इसे दूसरों को अपमानित करने की आदत नहीं कहना चाहिए।
उत्तर: सही विकल्प (क), (ख) और (ग)।
प्रश्न 5. गौरैयों के बार-बार लौटने से कौन-सा जीवन-मूल्य प्रकट होता है? (क) दूसरों पर निर्भर रहना; (ख) हार मानना; (ग) निरंतर प्रयास; (घ) संघर्ष छोड़ देना।
व्याख्या: गौरैयाँ कई बार बाहर निकाले जाने पर भी घोंसले के पास लौटती हैं।
उत्तर: सही विकल्प (ग), अपने प्रयास निरंतर जारी रखना।
मिलकर करें मिलान: सात कथनों के पूरे अर्थ
| पूरा प्रश्न | अर्थ या सही मिलान | व्याख्या |
|---|---|---|
| पक्षियों के चहकने को पिताजी शोर और दूसरे लोग संगीत क्यों कहते हैं? | पिताजी को ध्वनि परेशान करती है, जबकि दूसरों को पक्षियों का चहकना अच्छा लगता है। | एक ही ध्वनि के प्रति अलग-अलग लोगों की अनुभूति भिन्न हो सकती है। |
| आम के पेड़ पर पक्षियों के ‘डेरा डालने’ का अर्थ क्या है? | यह मुहावरेदार प्रयोग है, पक्षी सचमुच तंबू नहीं लगाते। | अलग-अलग पक्षियों का पेड़ पर टिकना या रहना। |
| ‘धमाचौकड़ी’ से घर के लोग क्यों नहीं सो पाते? | रात में चूहों की दौड़-भाग से आवाजें होती हैं और सामान गिरता है। | चूहों की शोरगुल वाली गतिविधियाँ नींद में बाधा डालती हैं। |
| पिताजी क्यों समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं? | माँ की व्यंग्यपूर्ण टिप्पणी पिताजी को अपनी असफलता पर उपहास जैसी लगती है। | पिताजी को लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं। |
| ‘छाती फुलाकर कुर्सी पर बैठना’ किस मनःस्थिति को दर्शाता है? | पिताजी समझते हैं कि उन्होंने गौरैयों को बाहर निकालकर जीत हासिल कर ली है। | गर्व और विजयी मुद्रा। |
| ‘रात पड़ गई’ का सही आशय क्या है? | यह समय के बीतने की सामान्य अभिव्यक्ति है। | अँधेरा छा गया और रात हो गई। |
| गौरैयों के ‘मल्हार गाने’ का सही भाव क्या है? | यह चहचहाने का कल्पनापूर्ण वर्णन है, शास्त्रीय राग का वास्तविक गायन नहीं। | गौरैयाँ लौटकर प्रसन्नतापूर्वक चहचहा रही थीं। |
पंक्तियों पर चर्चा: तीन प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1. माँ ने क्यों कहा कि घोंसला बन जाने के बाद गौरैयाँ नहीं उड़ेंगी?
व्याख्या: घोंसला पक्षियों का आश्रय बन चुका था और संभवतः उसमें अंडे भी थे।
उत्तर: वे उस स्थान को सुरक्षित घर मान चुकी थीं, इसलिए उसे छोड़ना कठिन था।
प्रश्न 2. पिताजी को क्यों लगा कि एक दिन घर में प्रवेश न कर पाने से गौरैयाँ लौटना छोड़ देंगी?
व्याख्या: वे सोचते थे कि लगातार बाधा मिलने पर पक्षी दूसरी जगह चले जाएँगे।
उत्तर: उनका अनुमान था कि प्रवेश बंद होने से गौरैयाँ घोंसला छोड़ देंगी, पर कहानी में ऐसा नहीं हुआ।
प्रश्न 3. घोंसला तोड़ देने की बात पिताजी की किस मनःस्थिति को दिखाती है?
व्याख्या: अनेक कोशिशों के विफल होने से वे क्रोधित और अधीर हो गए थे।
उत्तर: यह उनकी हताशा और कठोर निर्णय को दिखाता है, जिसे बच्चों की आवाज सुनकर वे बदल देते हैं।
सोच-विचार के लिए: आठ प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1. कहानी का कौन-सा पात्र आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों?
व्याख्या: यह व्यक्तिगत राय का प्रश्न है। उत्तर में पात्र का एक ठोस कार्य बताना चाहिए।
उत्तर: नमूना: मुझे माँ अच्छी लगीं, क्योंकि वे गौरैयों और उनके बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील थीं।
प्रश्न 2. गौरैयों ने घर में घोंसला कहाँ बनाया और संभवतः क्यों?
व्याख्या: पंखे के गोले का ऊँचा भाग उन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित आश्रय लगा होगा। यह उनके वास्तविक इरादे का अनुमान है।
उत्तर: बैठक की छत के पंखे के गोले में; शायद ऊँचाई और आश्रय के कारण।
प्रश्न 3. क्या पशु-पक्षी भी घर और परिवार के महत्त्व को समझते हैं? कहानी से प्रमाण दीजिए।
व्याख्या: पक्षियों का बच्चों को खिलाना और घोंसले में लौटना संतानों की देखभाल दर्शाता है। इसे मानव जैसी वैचारिक समझ का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
उत्तर: हाँ, वे आश्रय बनाते और बच्चों की देखभाल करते हैं; कहानी में बड़ी गौरैयाँ बार-बार लौटती हैं और बच्चों को चुग्गा देती हैं।
प्रश्न 4. ‘मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ’ से पिताजी के कौन-से गुण दिखते हैं?
व्याख्या: वे बार-बार नई योजना बनाते हैं, जिससे जिद और दृढ़ता दोनों सामने आती हैं।
उत्तर: पिताजी दृढ़ निश्चयी हैं, पर कभी-कभी हठी और जल्द गुस्सा करने वाले भी हैं।
प्रश्न 5. गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा परिवर्तन आया और क्यों?
व्याख्या: जब पिताजी घोंसला तोड़ने लगे, दोनों बड़ी गौरैयाँ बाहर गुमसुम बैठीं।
उत्तर: घोंसले और बच्चों को खतरा देखकर उनका चहचहाना बंद हो गया और वे व्याकुल दिखीं।
प्रश्न 6. गौरैयाँ किन-किन रास्तों से घर में वापस आईं?
व्याख्या: कहानी में दरवाजों के नीचे खाली जगह और टूटे शीशे वाला रोशनदान स्पष्ट हैं।
उत्तर: दरवाजों के नीचे की जगह और टूटे शीशे वाले रोशनदान से।
प्रश्न 7. कहानी कौन सुना रहा है और इसका प्रमाण क्या है?
व्याख्या: कथावाचक परिवार का बेटा है, जो माँ-पिताजी के साथ घर में रहता है और घटनाओं को ‘मैं’ कहकर बताता है।
उत्तर: परिवार का बेटा; कहानी प्रथम पुरुष में कही गई है।
प्रश्न 8. माँ क्यों कहती रहीं कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
व्याख्या: वे समझती थीं कि घोंसला बन चुका है और उसमें अंडे या बच्चे हो सकते हैं।
उत्तर: क्योंकि गौरैयों का घोंसला और उनके बच्चों का आश्रय उसी घर में था।
अनुमान और कल्पना से: छह प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1. यदि आपके घर में पक्षी घोंसला बनाने लगें, तो आप क्या करेंगे?
व्याख्या: पक्षियों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं करना चाहिए। साथ ही बिजली के उपकरण, भोजन और लोगों की सुरक्षा महत्त्वपूर्ण है।
उत्तर: नमूना: मैं दूरी से देखूँगा, पंखा बंद रखूँगा और जरूरत होने पर स्थानीय वन्यजीव विशेषज्ञ से सुरक्षित सलाह लूँगा।
प्रश्न 2. यदि गौरैयों की जगह चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली या मक्खी आती, तो परिवार का व्यवहार कैसे बदल सकता था?
व्याख्या: अलग प्राणियों से सुरक्षा और स्वच्छता के जोखिम अलग होते हैं। बिना हिंसा के उपयुक्त उपाय चुनने चाहिए।
उत्तर: नमूना: तितली को खिड़की से बाहर जाने दिया जा सकता है; मच्छरों के लिए जाली और जमा पानी हटाना उचित है; किसी घायल कुत्ते के लिए प्रशिक्षित सहायता ली जाए।
प्रश्न 3. लेखक किस दृश्य को देखकर अवाक् रह गया और क्यों?
व्याख्या: घोंसले से नन्हे बच्चों के निकलने और पिताजी के रुक जाने से स्थिति अप्रत्याशित रूप से बदलती है।
उत्तर: वह नन्ही गौरैयों और पिताजी के बदले व्यवहार को देखकर आश्चर्यचकित रह गया।
प्रश्न 4. माँ पिताजी की सहायता करने के बजाय क्यों हँसती रहीं?
व्याख्या: उन्हें पिताजी के नाचने-कूदने जैसी कोशिशें हास्यास्पद लगती थीं और वे पक्षियों के प्रति सहानुभूतिशील थीं।
उत्तर: क्योंकि उन्हें प्रयास व्यर्थ और मजेदार लगते थे तथा वे गौरैयों को हटाना नहीं चाहती थीं।
प्रश्न 5. किसी प्राणी के व्यवहार को देखकर उसका मनोभाव कैसे अनुमानित करेंगे? उदाहरण दीजिए।
व्याख्या: अनुमान बाहरी रूप या कपड़ों से नहीं, देखे गए व्यवहार से करना चाहिए।
उत्तर: नमूना: कोई पक्षी बार-बार घोंसले में दाना ले जा रहा है, इसलिए अनुमान है कि वह बच्चों को भोजन पहुँचा रहा होगा।
प्रश्न 6. सराय और घर में क्या अंतर है?
व्याख्या: सराय यात्रियों के अस्थायी ठहराव के लिए होती है, जबकि घर अपेक्षाकृत स्थायी निवास और अपनत्व का स्थान है।
उत्तर: सराय अस्थायी ठहराव का स्थान है; घर रहने और पारिवारिक जीवन का स्थान है।
संवाद और अभिनय: चार स्थितियों के पूरे नमूना संवाद
प्रश्न 1. घोंसले के बच्चों के चहचहाने को संवाद के रूप में कैसे प्रस्तुत करेंगे?
व्याख्या: मूल कहानी में बच्चों की आवाज का मानवीय अर्थ कथावाचक कल्पना से बताता है। संवाद भी मौलिक कल्पना होना चाहिए।
उत्तर: बच्चा 1: माँ कहाँ हैं? बच्चा 2: हमें भूख लगी है। बच्चा 1: सुनो, पंखों की आवाज आ रही है! बच्चा 2: देखो, हमारे माँ-पिता लौट आए!
प्रश्न 2. पिताजी के कूदने पर दो गौरैयाँ क्या बातें करती होंगी?
व्याख्या: लेखक हास्य के लिए पक्षियों को मानव जैसी बातचीत करता हुआ कल्पित करता है।
उत्तर: पहली गौरैया: यह आदमी इतना कूद क्यों रहा है? दूसरी: शायद हमें डराना चाहता है। पहली: हमें बच्चों के लिए सुरक्षित रहना है।
प्रश्न 3. पहली बार घर में प्रवेश करते समय गौरैयों की क्या बातचीत हो सकती थी?
व्याख्या: वे घर में अलग-अलग स्थान देखती हैं, इसलिए कल्पित बातचीत में आश्रय का चुनाव दिखाया जा सकता है।
उत्तर: पहली: यहाँ ऊपर एक शांत जगह है। दूसरी: पंखे के पास तिनके रख सकते हैं, लेकिन पहले देख लें कि यह सुरक्षित है या नहीं।
प्रश्न 4. माता-पिता गौरैयाँ लौटकर बच्चों को भोजन देते समय क्या कह सकती थीं?
व्याख्या: अंत में बड़ी गौरैयाँ बच्चों की चोंच में चुग्गा डालती हैं।
उत्तर: माँ गौरैया: हम लौट आए हैं। बच्चा: हमें भूख लगी थी। पिता गौरैया: लो, यह दाना खाओ।
बदली कहानी: यदि घोंसले में बच्चे न निकले होते
प्रश्न: कल्पना कीजिए कि घोंसले में अभी बच्चे नहीं निकले थे। तब कहानी का अंत कैसे बदल सकता था?
व्याख्या: मूल कहानी का निर्णायक मोड़ बच्चों की आवाज है। यदि बच्चे न होते, तो पिताजी का निर्णय तुरंत बदलना आवश्यक नहीं था। नई कहानी को स्पष्ट रूप से मौलिक कल्पना के रूप में लिखना चाहिए।
नमूना उत्तर: पिताजी घोंसले के कुछ तिनके हटाते हैं। माँ उन्हें रोककर कहती हैं कि खाली दिखने वाले घोंसले में भी अंडे हो सकते हैं। दोनों सुरक्षित दूरी से देखते हैं और पंखा बंद रखते हैं। कुछ दिनों बाद उन्हें पता चलता है कि गौरैयाँ अब भी वहीं लौटती हैं। पिताजी समझते हैं कि घोंसला किसी का आश्रय है। वे बिना नुकसान पहुँचाए समस्या सुलझाने के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेने का निर्णय करते हैं। इस तरह उनका मन बच्चों की आवाज के बिना भी धीरे-धीरे बदलता है।
कहने के ढंग: क्रिया-विशेषण के छह पूर्ण अभ्यास
क्रिया-विशेषण वह शब्द या पद है जो क्रिया के होने का ढंग, समय, स्थान या मात्रा बताता है। ‘खिलखिलाकर हँसना’ में खिलखिलाकर हँसने का ढंग बताता है।
| पूरा प्रश्न | अर्थ | पूरा उदाहरण वाक्य |
|---|---|---|
| ‘झिझककर’ का अर्थ बताइए और वाक्य बनाइए। | संकोच करते हुए। | उसने झिझककर मंच पर अपना परिचय दिया। |
| ‘गंभीरता से’ का अर्थ बताइए और वाक्य बनाइए। | गंभीर ढंग से। | शिक्षिका ने गंभीरता से सुरक्षा नियम समझाए। |
| ‘गुस्से में’ का अर्थ बताइए और वाक्य बनाइए। | क्रोधित होकर। | उसने गुस्से में बोलने के बजाय थोड़ी देर चुप रहना उचित समझा। |
| ‘धीरे से’ का वाक्य में प्रयोग कीजिए। | कम आवाज या गति से। | बच्चे ने धीरे से दरवाजा बंद किया। |
| ‘फुसफुसाते हुए’ का वाक्य बनाइए। | बहुत धीमी आवाज में। | दोनों मित्र पुस्तकालय में फुसफुसाते हुए बात कर रहे थे। |
| ‘सहमकर’ का वाक्य बनाइए। | डरते हुए। | बिल्ली तेज आवाज सुनकर सहमकर पीछे हट गई। |
घर के प्राणी: मानवीकरण के पाँच उदाहरण
| पूरा प्रश्न | मानवीय व्यवहार | पाठ-आधारित उत्तर |
|---|---|---|
| बिल्ली को कहानी में किस मानवीय व्यवहार से जोड़ा गया है? | आना-जाना अपनी इच्छा से करना और मानो लौटने की सूचना देना। | लेखक कल्पना करते हैं कि बिल्ली ‘फिर आऊँगी’ कहती है। |
| चूहों का वर्णन किस मानवीय आदत की तरह है? | अलग-अलग पसंद और रहने की जगह चुनना। | एक चूहा अँगीठी के पास बैठना पसंद करता है और दूसरा पानी की टंकी पर। |
| कबूतरों के व्यवहार को किस तरह बताया गया है? | उनकी आवाज को संगीत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। | कबूतर मानो दिनभर गुटरगूँ का संगीत सुनाते हैं। |
| गौरैयाँ किस मानवीय कार्य की तरह व्यवहार करती हैं? | वे मकान का निरीक्षण करती और मल्हार गाती हुई दिखाई गई हैं। | वे मानो घर जाँचती, बातचीत करती और गाना गाती हैं। |
| चमगादड़ों की गतिविधि किस मानवीय काम से जोड़ी गई है? | कमरों के आर-पार उड़ने को कसरत कहा गया है। | चमगादड़ मानो शाम को कसरत करते हैं। |
हेर-फेर मात्रा का: छह शब्द समूह और वाक्य
मात्रा बदलने पर उच्चारण, शब्द-रूप और अर्थ बदल सकते हैं। प्रत्येक समूह में पूरा वाक्य पढ़कर अंतर समझिए।
| पूरा प्रश्न | शब्दों का अर्थ | उदाहरण वाक्य |
|---|---|---|
| ‘नाच’, ‘नाचा’ और ‘नचा’ का अर्थ तथा वाक्य कैसे अलग हैं? | नाच: नृत्य; नाचा: स्वयं नृत्य किया; नचा: किसी को नृत्य करवाने का आदेश या क्रिया-रूप। | नाच सुंदर था। मोहन नाचा। बच्चों को नचा मत। |
| ‘हार’, ‘हरा’ और ‘हारा’ के अर्थ और वाक्य लिखिए। | हार: माला या पराजय; हरा: रंग अथवा हराना का क्रियारूप; हारा: पराजित। | उसने फूलों का हार पहना। पेड़ हरा है। खिलाड़ी मैच हारा। |
| ‘पिता’ और ‘पीता’ का अर्थ और वाक्य लिखिए। | पिता: जनक; पीता: पीने की क्रिया का रूप। | मेरे पिता शिक्षक हैं। वह पानी पीता है। |
| ‘चूक’ और ‘चुक’ में क्या अंतर है? | चूक: भूल या कमी; चुक: चुकना क्रिया का रूप, जैसे चुका या चुक जाना। | मेरी गणना में चूक हुई। ऋण चुक जाने पर रसीद लें। |
| ‘नीचा’ और ‘नीचे’ का अर्थ और वाक्य लिखिए। | नीचा: कम ऊँचाई वाला; नीचे: निम्न स्थान पर। | यह मंच नीचा है। पुस्तक मेज के नीचे है। |
| ‘सहसा’ और ‘साहस’ का अर्थ और वाक्य लिखिए। | सहसा: अचानक; साहस: हिम्मत। | सहसा वर्षा शुरू हुई। उसने साहस से सच कहा। |
वाद-विवाद: क्या माँ गौरैयों को घर से निकालना चाहती थीं?
प्रश्न: कथन के पक्ष और विपक्ष में प्रमाण सहित तर्क लिखिए तथा निष्कर्ष दीजिए।
पक्ष में नमूना तर्क: माँ ने एक दरवाजा खुला रखने और बाकी बंद करने की सलाह दी। इससे लगता है कि वे उस समय पिताजी की योजना को व्यावहारिक रूप देना चाहती थीं। घर की सफाई और सुविधा की चिंता भी हो सकती थी।
विपक्ष में नमूना तर्क: माँ बार-बार कहती हैं कि गौरैयाँ घोंसला छोड़ने वाली नहीं। वे पिताजी के प्रयासों पर हँसती हैं, बच्चों के होने की आशंका जताती हैं और अंत में दरवाजे खोल देती हैं।
निष्कर्ष: कहानी का अधिक मजबूत प्रमाण यह है कि माँ गौरैयों और उनके बच्चों के प्रति सहानुभूतिशील थीं। उनका कभी-कभार व्यावहारिक सुझाव देना इस संवेदना का खंडन नहीं करता।
कहानी की रचना: सात साहित्यिक विशेषताएँ
| पूरा प्रश्न | पाठ में उपयुक्त घटना | यह विशेषता कैसे काम करती है |
|---|---|---|
| कहानी में बढ़ा-चढ़ाकर कहने का उदाहरण और उसका प्रभाव क्या है? | पिताजी मानते हैं कि दिल्ली पहुँचने वाला हर पक्षी उनके घर ही आ जाता है। यह अतिशयोक्ति घर में पक्षियों की बहुतायत दिखाती है। | अतिशयोक्ति से हास्य और घर की चहल-पहल का प्रभाव बनता है। |
| हास्य का एक उदाहरण बताइए। | पिताजी गौरैयों को भगाने के लिए कूदते और हाथ हिलाते हैं, जबकि माँ हँसती हैं। | पिताजी की कूद-फाँद वाला दृश्य हास्य उत्पन्न करता है। |
| ‘सोचा कुछ और, हुआ कुछ और’ का उदाहरण क्या है? | पिताजी गौरैयों को बाहर निकालकर जीत समझते हैं, लेकिन वे वापस लौट आती हैं। | उनकी योजना का उलटा परिणाम निकलता है। |
| दूसरों के मन का अनुमान लगाने का उदाहरण क्या है? | माँ कल्पना करती हैं कि गौरैयाँ पिताजी को नाचता देखकर आपस में बातें कर रही हैं। | माँ पक्षियों के मन की काल्पनिक बातचीत बताती हैं। |
| किसी की बात सीधे उद्धृत करने का उदाहरण क्या है? | पिताजी के कथन और माँ के उत्तर को संवाद चिह्नों में लिखा गया है। | पात्रों के सीधे संवाद कहानी को जीवंत बनाते हैं। |
| प्राणी या उसके काम को दूसरा नाम देने का उदाहरण क्या है? | गौरैयों के चहचहाने को मल्हार गाना और चमगादड़ों के उड़ने को कसरत कहना। | मानवीकरण से वर्णन रोचक बनता है। |
| बिना बार-बार बोलने वाले का नाम बताए संवाद कैसे पहचाना जाता है? | लगातार प्रश्न-उत्तर और संदर्भ से पाठक समझ लेता है कि कौन बोल रहा है। | संवाद का क्रम और पात्रों की अलग भाषा पहचान में मदद करती है। |
पाठ से आगे: तीन व्यक्तिगत अनुभव प्रश्न
प्रश्न 1. अपने आसपास पक्षियों को क्या करते देखा है और उनके व्यवहार से क्या भाव समझते हैं?
व्याख्या: यह अनुभव-आधारित प्रश्न है। पक्षियों के व्यवहार का वर्णन करें; उनके मन के बारे में निष्कर्ष को अनुमान कहें।
उत्तर: नमूना: मैंने गौरैयों को तिनके जुटाते और बच्चों को भोजन देते देखा है। इससे देखभाल और सतर्कता का अनुमान होता है।
प्रश्न 2. क्या आपने कोई स्थान या वस्तु दूसरों के साथ साझा की है? कठिनाई कैसे सुलझाई?
व्याख्या: साझेदारी में संवाद, समय-निर्धारण और दूसरे की जरूरत समझना उपयोगी होता है।
उत्तर: नमूना: मैंने अपनी पढ़ने की मेज भाई के साथ साझा की। हमने अलग समय तय किया और समस्या दूर हो गई।
प्रश्न 3. क्या किसी व्यक्ति या जीव को देखकर कभी आपका दृष्टिकोण बदला है?
व्याख्या: यह व्यक्तिगत अनुभव का प्रश्न है, इसलिए उत्तर में बदलाव का कारण और पहले-बाद का अंतर होना चाहिए।
उत्तर: नमूना: पहले मैं घायल पक्षी के पास जाने से डरता था। सहायता केंद्र की टीम को काम करते देखकर मैंने समझा कि सुरक्षित दूरी और विशेषज्ञ सहायता अधिक उपयोगी है।
चिड़ियों का घोंसला: सुरक्षित अवलोकन तालिका
प्रश्न: बिना छुए अलग-अलग घोंसलों का स्थान, निर्माण सामग्री, स्थिति और पक्षी की पहचान कैसे दर्ज करेंगे?
उत्तर: केवल दूर से निरीक्षण करें। वास्तविक निरीक्षण के बिना किसी घोंसले को निश्चित रूप से किसी प्रजाति का न बताएँ। नीचे की तालिका नमूना है, वास्तविक सर्वेक्षण के आँकड़े नहीं।
| नमूना प्रश्न: घोंसला कहाँ देखा? | दिखने वाली सामग्री | स्थिति और पहचान कैसे दर्ज करें? |
|---|---|---|
| पेड़ की ऊँची शाखा पर घोंसला दिखे तो क्या लिखेंगे? | तिनके या घास दिखाई दे सकती है। | लिखें: दूर से देखा; पक्षी की पहचान निश्चित नहीं। |
| इमारत के छज्जे के नीचे घोंसला दिखे तो क्या लिखेंगे? | सूखी घास या अन्य हल्की सामग्री दिखाई दे सकती है। | लिखें: छज्जे के नीचे; खाली है या नहीं, दूर से स्पष्ट न हो तो अज्ञात। |
| किसी दीवार के सुरक्षित छेद में पक्षी आते दिखें तो क्या लिखेंगे? | सामग्री भीतर होने से दिखाई न भी दे। | लिखें: दीवार के छेद में आवाजाही; बिना छेड़े अवलोकन। |
प्रश्न: पक्षियों के घोंसलों पर पाँच स्लाइड की प्रस्तुति कैसे बनाएँ?
उत्तर: स्लाइड 1 में विषय और उद्देश्य, स्लाइड 2 में विभिन्न प्रकार के घोंसले, स्लाइड 3 में निर्माण सामग्री, स्लाइड 4 में सुरक्षा और संरक्षण, तथा स्लाइड 5 में स्रोत और निष्कर्ष रखें। केवल अनुमति प्राप्त या स्वयं खींचे गए दूर से लिए चित्र प्रयोग करें। अंडों या बच्चों को छुएँ नहीं।
मल्हार: राग और पुस्तक का नाम
प्रश्न: कहानी में गौरैयों के मल्हार गाने और हिंदी पुस्तक का नाम मल्हार होने का क्या संबंध है?
व्याख्या: मल्हार भारतीय शास्त्रीय संगीत में वर्षा ऋतु से जुड़ा राग-समूह है। कहानी में पक्षियों का चहचहाना कल्पनापूर्ण ढंग से मल्हार गाना कहा गया है।
उत्तर: पक्षियों का चहचहाना संगीत जैसा लगता है; मल्हार वर्षा से जुड़ा राग है और पुस्तक का नाम भी मल्हार है। गौरैयाँ वास्तव में शास्त्रीय राग का प्रशिक्षण नहीं लेतीं।
हास्य-व्यंग्य: पूरा प्रश्न और उदाहरण
प्रश्न 1. कहानी का कौन-सा दृश्य पढ़कर हँसी आती है और क्यों?
व्याख्या: पिताजी ताली बजाते, हाथ हिलाते और कूदते हैं, लेकिन गौरैयाँ घोंसला नहीं छोड़तीं। असफलता और असामान्य हरकतें हास्य पैदा करती हैं।
उत्तर: पिताजी का गौरैयों को भगाने के लिए नाचने जैसा कूदना सबसे हास्यपूर्ण दृश्य है।
प्रश्न 2. माँ की कौन-सी टिप्पणी व्यंग्य है और क्यों?
व्याख्या: माँ याद दिलाती हैं कि पिताजी चूहों को भी नहीं निकाल पाए, इसलिए गौरैयों को भगाने का उनका विश्वास अतिशयोक्तिपूर्ण है।
उत्तर: चूहों को न निकाल पाने की याद दिलाना व्यंग्य है, क्योंकि यह पिताजी के दावे की कमजोरी दिखाता है।
प्रश्न 3. हास्य और व्यंग्य में क्या अंतर है?
व्याख्या: हास्य का मुख्य प्रभाव हँसी है; व्यंग्य हँसी या संकेत से किसी कमी या विरोधाभास पर ध्यान दिलाता है।
उत्तर: हास्य मनोरंजन करता है, जबकि व्यंग्य मनोरंजन के साथ आलोचनात्मक सोच भी जगाता है।
आज की पहेली: बिल्ली को चूहे तक पहुँचाने का चित्र अभ्यास
प्रश्न: पुस्तक की चित्र-पहेली में बिल्ली से चूहे तक सही रास्ता कैसे खोजेंगे?
व्याख्या: रास्ता चित्र की दीवारों और खुले मार्गों पर निर्भर करता है। बिना चित्र पर वास्तविक रेखा खींचे किसी क्रम या दिशा को निश्चित बताना गलत होगा।
उत्तर: पुस्तक के पृष्ठ 27 की भूलभुलैया में बिल्ली से शुरू करें, केवल खुले रास्तों से आगे बढ़ें और बंद मार्ग मिलने पर पिछले मोड़ तक लौटें। सटीक रेखाचित्र के लिए मूल पहेली देखें।
झरोखे से: विश्व गौरैया दिवस और संरक्षण
प्रश्न: विश्व गौरैया दिवस कब मनाया जाता है और इसका उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: 20 मार्च को गौरैया संरक्षण के प्रति जागरूकता के लिए विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। पाठ में प्रेस सूचना ब्यूरो का लेख पढ़ने और चर्चा करने को कहा गया है।
उत्तर: 20 मार्च; गौरैयों और उनके आवासों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
प्रश्न: गौरैयों के संरक्षण में विद्यार्थी सुरक्षित रूप से क्या योगदान दे सकते हैं?
उत्तर: स्थानीय पक्षियों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास और देशी पौधों का समर्थन करें, साफ पानी रखें जहाँ सुरक्षित हो, कीटनाशकों का अनावश्यक उपयोग कम करें और घोंसलों को न छुएँ। किसी घायल पक्षी के लिए प्रशिक्षित बचावकर्मी की सहायता लें।
आगे पढ़ें: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2112370
पढ़ने के लिए: मित्रलाभ का विस्तृत सारांश
यह मुख्य कहानी के बाद दिया गया अलग अतिरिक्त पठन है। इसमें पंचतंत्र की परंपरा के अनुसार कौआ लघुपतनक, कबूतरों का राजा चित्रग्रीव, चूहा हिरण्यक, कछुआ मंथरक और हिरन चित्रांग प्रमुख पात्र हैं। एक शिकारी दाना बिखेरकर जाल लगाता है। चित्रग्रीव और उसके साथी फँस जाते हैं, लेकिन मिलकर जाल उठाकर उड़ते हैं। हिरण्यक चूहा उनके बंधन काटता है। बाद में कौए और चूहे की मित्रता होती है। वे कछुए और हिरन के मित्र बनते हैं। संकट के समय मित्र अपनी-अपनी क्षमता से एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
मित्रलाभ: पात्र और भूमिका
| पूरा प्रश्न | उत्तर | कहानी में योगदान |
|---|---|---|
| लघुपतनक कौन है और उसका गुण क्या है? | एक कौआ; सतर्क और सहयोगी। | वह दूसरों को खतरे की चेतावनी देता है। |
| चित्रग्रीव कौन है और उसने साथियों को कैसे बचाया? | कबूतरों का राजा; सामूहिक उड़ान की योजना बनाई। | सब कबूतर जाल समेत उड़ गए। |
| हिरण्यक कौन है और उसने क्या सहायता की? | एक चूहा; जाल के धागे काटे। | उसने पहले साथियों को मुक्त किया। |
| मंथरक कौन है और मित्रों से उसका संबंध क्या है? | एक कछुआ; विश्वसनीय मित्र। | संकट में मित्रों के साथ सहयोग करता है। |
| चित्रांग कौन है और उसकी समस्या क्या थी? | एक हिरन; शिकारी के जाल में फँसा। | मित्र उसे छुड़ाने की योजना बनाते हैं। |
मित्रलाभ से पाँच प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1. चित्रग्रीव ने जाल में फँसने पर साथियों को क्या सलाह दी?
व्याख्या: एक-एक कर छूटने की कोशिश के बजाय सामूहिक प्रयास अधिक प्रभावी था।
उत्तर: सब कबूतरों को एक साथ जाल लेकर उड़ने की सलाह दी।
प्रश्न 2. हिरण्यक ने चित्रग्रीव के साथियों को पहले क्यों छुड़ाया?
व्याख्या: चित्रग्रीव ने नेतृत्व का अर्थ अपने साथियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना बताया।
उत्तर: क्योंकि चित्रग्रीव ने अपने साथियों को पहले मुक्त करने का आग्रह किया।
प्रश्न 3. कौए और चूहे में आरंभ में अविश्वास क्यों था?
व्याख्या: कौआ चूहे का प्राकृतिक शत्रु हो सकता है, इसलिए चूहा सावधान था।
उत्तर: स्वाभाविक शिकारी-शिकार संबंध के कारण।
प्रश्न 4. कौए ने चूहे का विश्वास कैसे जीता?
व्याख्या: उसने मित्रता के लिए समय दिया और चूहे की सीमा का सम्मान किया।
उत्तर: धैर्य, बातचीत और उसके बिल में प्रवेश न करने का वचन देकर।
प्रश्न 5. ‘दो गौरैया’ और ‘मित्रलाभ’ का साझा संदेश क्या है?
व्याख्या: दोनों रचनाएँ जीवों के व्यवहार को समझने और सह-अस्तित्व का मूल्य दिखाती हैं; मित्रलाभ में सहयोग पर विशेष बल है।
उत्तर: संवेदना, विश्वास और सहयोग से कठिनाइयों का समाधान हो सकता है।
बीस मौलिक पुनरावृत्ति प्रश्न और व्याख्यासहित उत्तर
अभ्यास 1. ‘दो गौरैया’ के लेखक कौन हैं?
व्याख्या: भीष्म साहनी।
उत्तर: लेखक का नाम पाठ के अंत में दिया है।
अभ्यास 2. कहानी की विधा क्या है?
व्याख्या: कहानी।
उत्तर: यह घटनाओं और पात्रों वाला गद्य है।
अभ्यास 3. घर में कितने मनुष्य रहते थे?
व्याख्या: तीन।
उत्तर: माँ, पिताजी और कथावाचक।
अभ्यास 4. पिताजी घर को क्या कहते थे?
व्याख्या: सराय।
उत्तर: जीव-जंतुओं की आवाजाही के कारण।
अभ्यास 5. घर के आँगन में कौन-सा पेड़ था?
व्याख्या: आम का पेड़।
उत्तर: अनेक पक्षी वहाँ आते थे।
अभ्यास 6. गौरैयाँ कितनी थीं?
व्याख्या: दो बड़ी गौरैयाँ।
उत्तर: वे घर में घोंसला बनाती हैं।
अभ्यास 7. घोंसला कहाँ बनाया गया?
व्याख्या: बैठक के पंखे के गोले में।
उत्तर: ऊँचाई पर तिनके रखे गए थे।
अभ्यास 8. गौरैयाँ पहले कहाँ से वापस आईं?
व्याख्या: दरवाजों के नीचे से।
उत्तर: दरवाजों के नीचे जगह थी।
अभ्यास 9. बाद में वे कहाँ से लौटीं?
व्याख्या: टूटे शीशे वाले रोशनदान से।
उत्तर: एक शीशा टूटा था।
अभ्यास 10. पिताजी ने क्या उठाया?
व्याख्या: लाठी।
उत्तर: वे पक्षियों को भगाने लगे।
अभ्यास 11. माँ का स्वभाव कैसा है?
व्याख्या: विनोदी और संवेदनशील।
उत्तर: वे चिड़ियों के प्रति सहानुभूति रखती हैं।
अभ्यास 12. पिताजी क्यों चिढ़ते हैं?
व्याख्या: गौरैयों को हटाने की कोशिश विफल होती है।
उत्तर: उनकी योजनाएँ बार-बार असफल होती हैं।
अभ्यास 13. ‘गुमसुम’ का अर्थ क्या है?
व्याख्या: चुप और उदास।
उत्तर: बड़ी गौरैयाँ घोंसले के खतरे पर चुप थीं।
अभ्यास 14. ‘अवाक्’ का अर्थ क्या है?
व्याख्या: आश्चर्य से बोल न पाना।
उत्तर: कथावाचक अंत में चकित होता है।
अभ्यास 15. ‘चुग्गा’ क्या है?
व्याख्या: पक्षियों का भोजन।
उत्तर: बड़ी गौरैयाँ बच्चों को खिलाती हैं।
अभ्यास 16. कहानी का चरम बिंदु क्या है?
व्याख्या: घोंसले से बच्चों की आवाज आना।
उत्तर: इससे पिताजी रुक जाते हैं।
अभ्यास 17. अंत में पिताजी क्या करते हैं?
व्याख्या: मुसकराते हैं।
उत्तर: वे पक्षियों को रहने देते हैं।
अभ्यास 18. ‘खिलखिलाकर’ किस प्रकार का शब्द है?
व्याख्या: क्रिया-विशेषण।
उत्तर: यह हँसने का ढंग बताता है।
अभ्यास 19. राग मल्हार किस ऋतु से जुड़ा है?
व्याख्या: वर्षा ऋतु से।
उत्तर: पुस्तक का नाम भी मल्हार है।
अभ्यास 20. कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
व्याख्या: करुणा और सह-अस्तित्व।
उत्तर: पिताजी का दृष्टिकोण बदलता है।
दस अतिरिक्त MCQs: पूर्ण विकल्प और उत्तर
MCQ 1. कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद | (ख) भीष्म साहनी | (ग) हरिशंकर परसाई | (घ) महादेवी वर्मा
व्याख्या: पाठ के अंत में उनका नाम है।
सही उत्तर: (ख) भीष्म साहनी
MCQ 2. कहानी किसकी दृष्टि से कही गई है?
(क) माँ | (ख) पिताजी | (ग) घर के बेटे | (घ) पड़ोसी
व्याख्या: कथावाचक ‘मैं’ कहता है।
सही उत्तर: (ग) घर के बेटे
MCQ 3. गौरैयों ने घोंसला कहाँ बनाया?
(क) अलमारी | (ख) पंखे का गोला | (ग) बगीचे का गमला | (घ) रसोई का चूल्हा
व्याख्या: बैठक के पंखे के पास घोंसला था।
सही उत्तर: (ख) पंखे का गोला
MCQ 4. पिताजी किससे गौरैयों को भगाने लगे?
(क) किताब | (ख) लाठी | (ग) पानी | (घ) जाल
व्याख्या: वे लाठी से घोंसले तक पहुँचते हैं।
सही उत्तर: (ख) लाठी
MCQ 5. गौरैयाँ किस रास्ते से लौटीं?
(क) केवल छत से | (ख) दरवाजे के नीचे और रोशनदान से | (ग) चिमनी से | (घ) सुरंग से
व्याख्या: दोनों रास्ते कहानी में आते हैं।
सही उत्तर: (ख) दरवाजे के नीचे और रोशनदान से
MCQ 6. ‘अवाक्’ का अर्थ क्या है?
(क) प्रसन्न | (ख) चकित होकर चुप | (ग) भूखा | (घ) नाराज
व्याख्या: कथावाचक अचानक बदले दृश्य से चकित है।
सही उत्तर: (ख) चकित होकर चुप
MCQ 7. ‘खिलखिलाकर’ किसका उदाहरण है?
(क) क्रिया-विशेषण | (ख) सर्वनाम | (ग) संज्ञा | (घ) समुच्चयबोधक
व्याख्या: यह हँसने का ढंग बताता है।
सही उत्तर: (क) क्रिया-विशेषण
MCQ 8. कहानी का निर्णायक मोड़ क्या है?
(क) चूहे का भागना | (ख) बच्चों की आवाज | (ग) बारिश होना | (घ) बिल्ली का आना
व्याख्या: इससे पिताजी घोंसला तोड़ना रोक देते हैं।
सही उत्तर: (ख) बच्चों की आवाज
MCQ 9. राग मल्हार किस ऋतु से जुड़ा है?
(क) शीत | (ख) ग्रीष्म | (ग) वर्षा | (घ) वसंत
व्याख्या: राग मल्हार का वर्षा से सांस्कृतिक संबंध है।
सही उत्तर: (ग) वर्षा
MCQ 10. विश्व गौरैया दिवस कब है?
(क) 20 मार्च | (ख) 5 जून | (ग) 15 अगस्त | (घ) 2 अक्टूबर
व्याख्या: यह गौरैया संरक्षण जागरूकता का दिन है।
सही उत्तर: (क) 20 मार्च
उच्चस्तरीय चिंतन और परीक्षा में सामान्य गलतियाँ
प्रश्न 1. क्या पिताजी की जिद और करुणा एक ही पात्र में हो सकती हैं?
व्याख्या: कहानी में व्यक्ति के व्यवहार का परिवर्तन दिखाया गया है। प्रारंभिक झुँझलाहट अंत में बच्चों के प्रति संवेदना में बदलती है।
उत्तर: हाँ। पिताजी हठी हैं, पर अंत में करुणा दिखाते हैं।
प्रश्न 2. माँ की हँसी और संवेदनशीलता में क्या संबंध है?
व्याख्या: माँ पिताजी के असफल उपायों पर हँसती हैं, लेकिन बच्चों के खतरे को गंभीरता से लेती हैं।
उत्तर: उनकी विनोदप्रियता जीवों के प्रति करुणा के विपरीत नहीं है।
प्रश्न 3. क्या किसी पक्षी का घोंसला हर परिस्थिति में उसी जगह रहने देना सुरक्षित है?
व्याख्या: बिजली के उपकरण या लोगों के रहने के स्थान पर जोखिम हो सकता है। संरक्षण और सुरक्षा दोनों आवश्यक हैं।
उत्तर: जोखिम होने पर उपकरण बंद रखकर प्रशिक्षित वन्यजीव सहायता से सुरक्षित उपाय अपनाएँ।
| गलत उत्तर | सही सुधार |
|---|---|
| कहानी में चार मनुष्य रहते हैं। | माँ, पिताजी और बेटा, कुल तीन मनुष्य रहते हैं। |
| गौरैयों ने घोंसला आम के पेड़ पर बनाया। | उन्होंने बैठक के पंखे के गोले में घोंसला बनाया। |
| माँ शुरू से चिड़ियों को मारना चाहती थीं। | वे चिड़ियों के प्रति सहानुभूतिशील थीं। |
| गौरैयाँ केवल दरवाजे से लौटीं। | दरवाजे के नीचे की जगह और टूटे रोशनदान से भी लौटीं। |
| अंत में पिताजी घोंसला तोड़ देते हैं। | बच्चों की आवाज सुनकर वे रुक जाते हैं। |
| मल्हार गाने का अर्थ पक्षियों ने संगीत सीखा। | यह चहचहाने का कल्पनात्मक वर्णन है। |
| ‘मित्रलाभ’ ही ‘दो गौरैया’ की मुख्य कहानी है। | मित्रलाभ अलग अतिरिक्त पठन है। |
स्रोत और सत्यापन
मुख्य स्रोत: एनसीईआरटी हिंदी मल्हार, कक्षा 8, पाठ 2 ‘दो गौरैया’, मुद्रित पृष्ठ 14 से 28; ‘मित्रलाभ’ अतिरिक्त पठन पृष्ठ 29 से 35। मूल पाठ और अभ्यासों की जाँच पाठ्यपुस्तक के उपलब्ध PDF से की गई। पहेली के चित्र का वास्तविक रास्ता इस HTML में नहीं बनाया गया है; उसे मूल चित्र पर हल करना होगा। अनुभव आधारित उत्तर नमूने हैं। सुरक्षित पक्षी-अवलोकन के निर्देश शैक्षिक सलाह हैं, मूल कहानी का कथानक नहीं।
पाठ्यपुस्तक PDF: https://files.supercop.in/ncert-books/2025/class8/hhml102.pdf
Frequently asked questions
‘दो गौरैया’ के लेखक कौन हैं?
भीष्म साहनी।
‘दो गौरैया’ किस पुस्तक का पाठ है?
एनसीईआरटी कक्षा 8 हिंदी मल्हार का पाठ 2।
कहानी का कथावाचक कौन है?
घर का बेटा, जो ‘मैं’ शैली में कहानी सुनाता है।
घर में कितने मनुष्य रहते थे?
तीन, माँ, पिताजी और कथावाचक।
पिताजी घर को सराय क्यों कहते हैं?
क्योंकि अनेक जीव-जंतु घर में रहते और आते-जाते हैं।
गौरैयों ने घोंसला कहाँ बनाया?
बैठक के पंखे के गोले में।
गौरैयाँ घर में वापस कैसे आती थीं?
दरवाजों के नीचे की जगह और टूटे रोशनदान से।
पिताजी उन्हें भगाने के लिए क्या करते हैं?
ताली बजाते, कूदते और लाठी से भगाने का प्रयास करते हैं।
माँ गौरैयों को क्यों नहीं भगाना चाहती थीं?
वे घोंसले और संभावित बच्चों की सुरक्षा को समझती थीं।
गौरैयाँ कब गुमसुम हो गईं?
जब पिताजी घोंसला तोड़ने लगे।
कहानी का निर्णायक मोड़ क्या है?
घोंसले से नन्हे बच्चों की आवाज सुनाई देना।
अंत में पिताजी क्यों मुसकराते हैं?
क्योंकि बच्चों को देखकर उनका मन बदल जाता है।
‘अवाक्’ का अर्थ क्या है?
आश्चर्य से चुप हो जाना।
‘गुमसुम’ का अर्थ क्या है?
चुप और उदास।
‘चुग्गा’ का अर्थ क्या है?
पक्षियों का भोजन।
‘खिलखिलाकर’ किसका उदाहरण है?
क्रिया-विशेषण।
कहानी में व्यंग्य का उदाहरण क्या है?
माँ का पिताजी को चूहों को भी न निकाल पाने की याद दिलाना।
मल्हार राग किस ऋतु से जुड़ा है?
वर्षा ऋतु।
विश्व गौरैया दिवस कब मनाया जाता है?
20 मार्च।
‘मित्रलाभ’ क्या है?
मुख्य कहानी के बाद दिया गया अलग अतिरिक्त पठन।
‘मित्रलाभ’ में चित्रग्रीव कौन है?
कबूतरों का राजा।
हिरण्यक कौन है?
एक चूहा जो जाल के बंधन काटता है।
कहानी का केंद्रीय संदेश क्या है?
करुणा, सह-अस्तित्व और दृष्टिकोण में परिवर्तन।
क्या पंखे में पक्षियों का घोंसला सुरक्षित है?
सक्रिय पंखा जोखिमपूर्ण हो सकता है। उसे बंद रखें और विशेषज्ञ से सलाह लें।
