पाठ का सार
कामतानाथ जी की यह कहानी मशीनी युग की विभीषिका पर प्रकाश डालती है जिसने लाखों कारीगरों के हाथ-पैर काट दिए हैं।
- बदलू मनिहार: लाख की सुंदर चूड़ियाँ बनाता था और वस्तु-विनिमय (अनाज के बदले चूड़ियाँ) से जीवन यापन करता था।
- जब काँच की मशीनी चूड़ियों का प्रचलन बढ़ा, तो बदलू का पुश्तैनी व्यवसाय ठप हो गया। परंतु कठिन परिस्थितियों में भी उसने अपना स्वाभिमान नहीं खोया।