व्यंग्य का सार
हिंदी के मूर्धन्य व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की यह रचना टूटी-फूटी खटारा बसों के संचालन और निजी बस कंपनियों द्वारा यात्रियों के जीवन से खिलवाड़ पर व्यंग्य करती है।
- लेखक और उनके चार मित्र शाम की बस से पन्ना से सतना जा रहे थे। बस की हालत 'वृद्धावस्था' जैसी थी, जिसके हर पुर्जे दूसरे से असहयोग आंदोलन कर रहे थे।
- बस का कभी पेट्रोल टैंक लीक होना, कभी टायर पंचर होना और रात में हेडलाइट बुझ जाना हास्य और व्यंग्य का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।