कविता का भावार्थ
प्रकृति के सुकुमार कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' इस कविता के माध्यम से आलस्य और निराशा में डूबी युवा पीढ़ी को जागृत करने का संकल्प लेते हैं।
- "अभी न होगा मेरा अंत / अभी-अभी ही तो आया है / मेरे वन में मृदुल वसंत..."
- कवि का मानना है कि उनके जीवन रूपी उपवन में वसंत का आगमन हुआ है। वे अपने स्वप्निल कोमल हाथों को अलसाई कलियों पर फेरकर एक नए प्रभात का संचार करना चाहते हैं।