यात्रा वृत्तांत का सार
सन् 1929-30 में लेखक राहुल सांकृत्यायन ने नेपाल के रास्ते तिब्बत की गुप्त यात्रा एक भिखमंगे के छद्म वेश में की थी, क्योंकि उस समय भारतीयों को तिब्बत जाने की अनुमति नहीं थी।
- डाँडे थोङ्ला के खतरनाक निर्जन रास्ते, डाकुओं का भय, तिब्बती समाज में पर्दा प्रथा और छुआछूत का न होना तथा मंगोल भिक्षु सुमति का सहयोग इस पाठ के मुख्य आकर्षण हैं।