पाठ का सार
प्रेमचंद जी द्वारा रचित 'दो बैलों की कथा' केवल पशुओं की कहानी नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के मूल्य और स्वाभिमान की प्रेरक गाथा है।
- हीरा और मोती: झूरी काछी के दो बैल, जो अत्यंत स्वाभिमानी और एक-दूसरे के प्रति समर्पित हैं।
- गया के अत्याचार से भागना, कांजीहौस की दीवार तोड़कर अन्य असहाय पशुओं को मुक्त कराना और अंततः कसाई के चंगुल से छूटकर अपने मालिक झूरी के घर लौटना यह सिद्ध करता है कि स्वतंत्रता सरलता से नहीं मिलती, उसके लिए निरंतर संघर्ष करना पड़ता है।