बालगोबिन भगत का व्यक्तित्व एवं रेखाचित्र
लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा रचित 'बालगोबिन भगत' एक विशिष्ट रेखाचित्र है, जिसके माध्यम से उन्होंने एक ऐसे गृहस्थ साधु का चित्रण किया है जो बाह्य आडंबरों, वेशभूषा और अनुष्ठानों से परे सच्चे अर्थों में संन्यासी थे।
भगत जी की विशेषताएँ:
- कबीरपंथी जीवन: वे कबीर को अपना 'साहब' मानते थे, उन्हीं के पदों को गाते और उन्हीं के आदर्शों पर चलते थे। किसी की वस्तु बिना पूछे नहीं छूते थे और खेत की सारी उपज पहले कबीर मठ में भेंट स्वरूप अर्पित कर देते थे।
- संगीत साधना: प्रभातियों के माध्यम से आषाढ़ की रिमझिम में खेत में रोपनी करते हुए उनका गायन पूरे गाँव को मंत्रमुग्ध कर देता था।
- रूढ़ियों पर प्रहार: अपने इकलौते बेटे की मृत्यु पर शोक मनाने के स्थान पर उन्होंने उत्सव मनाया, क्योंकि उनका मानना था कि विरहिणी आत्मा अपने परमात्मा से मिल गई है। उन्होंने बेटे की चिता को मुखाग्नि अपनी पतोहू (पुत्रवधू) से दिलवाई और उसके पुनर्विवाह का आदेश देकर तत्कालीन समाज की सड़ी-गली मान्यताओं पर करारा प्रहार किया।